राजस्थान अपनी रंग-बिरंगी संस्कृति, लोक परंपराओं और स्वादिष्ट भोजन के लिए पूरे भारत में प्रसिद्ध है। यहां के पारंपरिक व्यंजनों में केर-सांगरी का नाम सबसे खास माना जाता है। यह एक ऐसी देसी सब्जी है जो राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्रों में पाई जाने वाली प्राकृतिक उपज से बनाई जाती है। केर एक छोटी जंगली बेरी होती है और सांगरी खेजड़ी के पेड़ की लंबी फलियां होती हैं। दोनों को सुखाकर लंबे समय तक सुरक्षित रखा जाता है और फिर मसालों के साथ स्वादिष्ट तरीके से पकाया जाता है।
राजस्थान के मरुस्थलीय इलाकों में पानी और हरी सब्जियों की कमी होने के कारण लोगों ने ऐसी खाद्य परंपराएं विकसित कीं जो लंबे समय तक चल सकें। केर-सांगरी उसी बुद्धिमत्ता और परंपरा का उदाहरण है। इसे खासतौर पर मारवाड़ क्षेत्र में बहुत पसंद किया जाता है और यह लगभग हर पारंपरिक राजस्थानी थाली का हिस्सा होती है।
केर-सांगरी का स्वाद हल्का खट्टा, तीखा और मसालेदार होता है। इसे बनाने के लिए पहले सूखी केर और सांगरी को पानी में भिगोया जाता है ताकि वे नरम हो जाएं। इसके बाद सरसों के तेल में जीरा, हींग, लाल मिर्च, धनिया और अमचूर जैसे मसालों के साथ पकाया जाता है। कई लोग इसमें किशमिश या सूखे मेवे भी डालते हैं जिससे इसका स्वाद और भी खास हो जाता है।
यह सब्जी सिर्फ स्वाद में ही नहीं बल्कि सेहत के लिए भी फायदेमंद मानी जाती है। केर-सांगरी में फाइबर, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं जो पाचन और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होते हैं। राजस्थान के गांवों में लोग इसे बाजरे की रोटी, दाल-बाटी या मिस्सी रोटी के साथ खाना पसंद करते हैं।
आज के समय में केर-सांगरी सिर्फ राजस्थान तक सीमित नहीं रही। अब यह पूरे भारत और विदेशों में भी लोकप्रिय हो रही है। कई ऑनलाइन स्टोर और रेस्टोरेंट इसे अपने मेन्यू में शामिल कर रहे हैं। यहां तक कि राजस्थानी भोजन पर होने वाले विशेष आयोजनों और सरकारी भोजों में भी केर-सांगरी को खास स्थान दिया जाता है।
अगर आप राजस्थान के असली देसी स्वाद का अनुभव करना चाहते हैं, तो केर-सांगरी जरूर चखें। यह सिर्फ एक सब्जी नहीं बल्कि राजस्थान की संस्कृति, परंपरा और रेगिस्तान की जीवनशैली का प्रतीक है।

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